Saturday, July 12, 2014

Savan Poem

मैंने नौवीं कक्षा में था जब मैंने यह कविता लिखी थी । यह आज भी मेरे मन में गूंजती रहती है ।

सावन 


सावन में गा रही
एक रंग बिरंगी मैना ।
उसका मधुर संगीत सुन
चमक उठी मेरी नैना ॥

  फल फूल लगे तरु मुस्कुराए 
हर पल सावन के गीत गाए ।
नील कण्ठ भी नाच दिखाए 
    सम्पूर्ण जगत खुशियाँ मनाये ॥ 

प्रकृति का अनमोल नजारा
चारो और है हरियाली ।
चहुँ ओर सुनहरे खिले फूल
मन में छाई खुशहाली ॥

स्वच्छ जल भंडार लिए 
नदियाँ कल कल बह रही । 
कभी निर्झर बन गिरी बेग से 
अब शरमाई सी लग रही ॥ 



बच्चे भी उमंग भरे
झूल रहे सावन के झूले ।
इन्द्रधनुष गगन में आकर
हंसी ठिठोली कर न भूले ॥




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